पत्थर का सिरहाना है, मिटटी का बिछोना है
आराम से इस तरह का ये उसका सोना है।
एक बशर जो चौराहे पर चिल्ला रहा था आज
सबको पता हे कल उसका क्या होना है।
जागते में तो सभी हम, कुछ भी यहाँ चिल्लाये
पर नींद आख़िर सबको एक सी ही सोना है।
अच्छा है सबने हाथों में उठा ली है शमशीरे
यह भी बता दो नफरत का कब इनसे कत्ल करना है ।
