29 /09 /2010
तुम,
पहले तो ऐसे नहीं थे, तुम
ये कैसे आजकल
हो गए हो, तुम.....!
तुम, पहले तो थोड़ा-बहुत
बतिया लेते थे, हमसे
कुछ बाँट लेते थे
अपनी खास बातें हमसे
मगर, कुछ दिनों से.. हम ये,
देख रहे है
कुछ उखड़े -उखड़े
हो गए हो .... तुम ! तुम, पहले तो ..
कौन सी बात मेरी
बुरी लग गयी है
जो इतनी दूर हमसे
रहने लगे हो
क्या वो वजह है कि
अब सारी बातें
सीने में छुपाकर
रखने लगे हो
मुझसे कुछ कहो
मुझे अपना समझो
ये बरताव मेरे संग
करों यूँ ना.... तुम ! तुम, पहले तो ..
बुधवार, 29 सितंबर 2010
रविवार, 26 सितंबर 2010
पिया, तोसे जो नैना मिलाऊँ
27 /09 /2010
पिया, तोसे जो नैना मिलाऊँ
तो मनवा
ऊँची उड़ाने भरने लगे!
हाँ ऊँची उड़ाने भरने लगे!
जो मन में आए वो करने लगे,
जो मन को भाए वो करने लगे!
काहे मेनें गवाए
फिजूल में दिन,
ये कजरा, सबसे शिकायत
करता फिरे,
जहाँ चाहूँ नहीं
ये कंगना वहां भी
खन-खन करता फिरे
तेरे संग रहूँ
तो बासा गजरा भी
खूब जोर से महकने लगे ! पिया, तोसे जो......
पल में जिया मेरा धरती पर
पल में जा पहुंचे ये अम्बर तक
जो तुने तीर छोड़ा है नैनों का
वो जा पहुंचा है करजवा में अन्दर तक
जो तुने चोट हमें दी
हम उसकी दवा
तेरे इश्क की मरहम से करने लगे ! पिया, तोसे जो......
कमलेश दुबे
शनिवार, 25 सितंबर 2010
ऐ सोन चिरैया
22/09/2010
ऐ सोन चिरैया मेरी तू,
मीठी शक्कर ढेरी तू.....!
सबको बताता फिरता हूँ कि,
हो गयी है अब मेरी तू....! ऐ सोन चिरैया
धडकन बनके लगा रही अब,
दिल के पास में फेरी तू......! ऐ सोन चिरैया
वक्त पे में आ जाता हूँ पर
अक्सर करती देरी तू......! ऐ सोन चिरैया
आम,जामुन, इमली थी कभी,
अब हो गयी मीठी बेरी तू.....! ऐ सोन चिरैया
कमलेश दुबे
ऐ सोन चिरैया मेरी तू,
मीठी शक्कर ढेरी तू.....!
सबको बताता फिरता हूँ कि,
हो गयी है अब मेरी तू....! ऐ सोन चिरैया
धडकन बनके लगा रही अब,
दिल के पास में फेरी तू......! ऐ सोन चिरैया
वक्त पे में आ जाता हूँ पर
अक्सर करती देरी तू......! ऐ सोन चिरैया
आम,जामुन, इमली थी कभी,
अब हो गयी मीठी बेरी तू.....! ऐ सोन चिरैया
कमलेश दुबे
चार कदम संग चलते लोग...!
25 /09 /2010
बेहद हिलते -डुलते लोग
रंग बदलकर मिलते लोग...!
जुल्म हदों के पर हुआ और,
फिर भी जुबां को सिलते लोग...! बेहद हिलते
आसमानी महंगाई में बस ये,
चार आने में बिकते लोग...! बेहद हिलते
समय पर कर दी होती दवा तो,
फिर से नहीं उभरते रोग....! बेहद हिलते
कबकी बदल जाती सूरत जो,
चार कदम संग चलते लोग...! बेहद हिलते
कमलेश दुबे
बेहद हिलते -डुलते लोग
रंग बदलकर मिलते लोग...!
जुल्म हदों के पर हुआ और,
फिर भी जुबां को सिलते लोग...! बेहद हिलते
आसमानी महंगाई में बस ये,
चार आने में बिकते लोग...! बेहद हिलते
समय पर कर दी होती दवा तो,
फिर से नहीं उभरते रोग....! बेहद हिलते
कबकी बदल जाती सूरत जो,
चार कदम संग चलते लोग...! बेहद हिलते
कमलेश दुबे
दिल पे कोई दवाब आया तो....!
26 /09 /2010
चलो, किसी का... ख्वाब आया तो,
दिल पे कोई दवाब आया तो....!
हाले दिल बहुत से लोगों तक अपना भेजा,
खुश हुआ एक का जवाब आया तो....!
सच कहूँ जबसे तेरे साथ रहा,
मुझको कुछ करना हिसाब आया तो,..!
अब दिन कटेंगे, मेरे कुछ मस्ती भरे,
इश्क की वो किताब लाया जो !
यूँ तो पीता नहीं पर चख ली मेनें
वो जो नैनों की शराब लाया तो..!
कमलेश दुबे
गुरुवार, 16 सितंबर 2010
मेरा देश महान रे भाई
मेरा देश महान
भूखा मरे किसान रे भाई
भूखा मरे किसान
दाल के भाव आसमान पर ...
महँगी पड़ने लगी हे रोटी
खादी पहने चोर लुटेरे
चट कर जाए पूरी बोटी
कामन वेल्थ की कढaइ में सबने
खूब तले पकवान
मेरा देश महान रे
गाँधी के सपनो का भारत
तिल तिल करके मरता हे
चोट पे मरहम रखने को
कोई ना आगे बढ़ता हे
आओ सब मिल कर इसकी
हम लोटा दे मुस्कान
मेरा देश महान
भूखा मरे किसान रे भाई
भूखा मरे किसान
दाल के भाव आसमान पर ...
महँगी पड़ने लगी हे रोटी
खादी पहने चोर लुटेरे
चट कर जाए पूरी बोटी
कामन वेल्थ की कढaइ में सबने
खूब तले पकवान
मेरा देश महान रे
गाँधी के सपनो का भारत
तिल तिल करके मरता हे
चोट पे मरहम रखने को
कोई ना आगे बढ़ता हे
आओ सब मिल कर इसकी
हम लोटा दे मुस्कान
तेरी खोज अभी भी जारी है
हाँ हर रोज ही जारी है
मैंने बाजी नहीं अभी हारी है
पूरी लड़ने की तैयारी है
...दिन भर अलग-अलग सूरत मै,
रात सितारों भरे फलक मै,
तुझसे एक पल नहीं अलग मै,
देखना चाहूँ तेरी एक झलक मै
सच तू मेरा संगवारी हे,
कहाँ- कहाँ नहीं खोजा तुझको
सारी कसोटी तोला तुझको
अपने सारे गम बोला तुझको
गले लगा ले मोला मुझको
हर काम मै तेरी फनकारी है
हाँ हर रोज ही जारी है
मैंने बाजी नहीं अभी हारी है
पूरी लड़ने की तैयारी है
...दिन भर अलग-अलग सूरत मै,
रात सितारों भरे फलक मै,
तुझसे एक पल नहीं अलग मै,
देखना चाहूँ तेरी एक झलक मै
सच तू मेरा संगवारी हे,
कहाँ- कहाँ नहीं खोजा तुझको
सारी कसोटी तोला तुझको
अपने सारे गम बोला तुझको
गले लगा ले मोला मुझको
हर काम मै तेरी फनकारी है
आओ थोड़ी गपशप
आओ थोड़ी गपशप कर लें
दिल को थोडा पुशअप कर लें !
उम्र बहुत थोड़ी हे अपनी
जो कुछ भी सब झटपट कर लें !
बातचीत जब बंद हो उससे तो
किसी बहाने खटपट कर लें !
पीने को दिल करे कभी तो
होठों को ही शरबत कर लें !
कमलेश दुबे
दिल को थोडा पुशअप कर लें !
उम्र बहुत थोड़ी हे अपनी
जो कुछ भी सब झटपट कर लें !
बातचीत जब बंद हो उससे तो
किसी बहाने खटपट कर लें !
पीने को दिल करे कभी तो
होठों को ही शरबत कर लें !
कमलेश दुबे
इस हवा पर
इस हवा पर लगा, पहरा फिर से
कांपने लगा हे, मेरा चेहरा फिर से!
हँसते हुए मै, सबको ही बुरा लगता हूँ
दे गया जख्म कोई गहरा फिर से !
आपके जुल्म ना देखे ना सुने मैंने,
...हो गया था मै अँधा और बहरा फिर से !
खेल शतरंज का जब खेले वो मिलकर खेले,
आदमी ही बना उनका मोहरा फिर से !
कमलेश दुबे
कांपने लगा हे, मेरा चेहरा फिर से!
हँसते हुए मै, सबको ही बुरा लगता हूँ
दे गया जख्म कोई गहरा फिर से !
आपके जुल्म ना देखे ना सुने मैंने,
...हो गया था मै अँधा और बहरा फिर से !
खेल शतरंज का जब खेले वो मिलकर खेले,
आदमी ही बना उनका मोहरा फिर से !
कमलेश दुबे
जो तुझसे बातें
जो तुझसे बातें साझा कर ले,
तू उसके गम आधा कर ले!
उलझ उलझ कर क्यों चलता है
रस्ता सीधा सादा कर ले !
तन्हा नहीं तू उड़ पायेगी
...ये पतंग तू मुझको धागा कर ले!
आज हंसी मौसम है फिर से,
कुछ ख्वाब पुराने ताजा कर ले !
कमलेश दुबे
तू उसके गम आधा कर ले!
उलझ उलझ कर क्यों चलता है
रस्ता सीधा सादा कर ले !
तन्हा नहीं तू उड़ पायेगी
...ये पतंग तू मुझको धागा कर ले!
आज हंसी मौसम है फिर से,
कुछ ख्वाब पुराने ताजा कर ले !
कमलेश दुबे
जुबां पे क्यों
जुबां पे क्यों ख़ामोशी ताले,
चलो साफ करे ये सारे जाले !
कहा उन्ही का बोलेंगे क्यों की,
सारे तोते उन्ही के पाले !
बेचारी एक मछली हे उस पर,
...डाल रहे सब अपने जाले !
यार मेरे संग मत चलना मै,
लेकर चलता हूँ खंजर- भाले !
हम ही कुछ निर्णय ले ले अब,
वो तो नहीं सुधरेंगे साले !
चलो साफ करे ये सारे जाले !
कहा उन्ही का बोलेंगे क्यों की,
सारे तोते उन्ही के पाले !
बेचारी एक मछली हे उस पर,
...डाल रहे सब अपने जाले !
यार मेरे संग मत चलना मै,
लेकर चलता हूँ खंजर- भाले !
हम ही कुछ निर्णय ले ले अब,
वो तो नहीं सुधरेंगे साले !
दिल के तार टटोला
दिल के तार टटोला कर,
कभी कभी कुछ बोला कर...!
तेरी एक हंसी दे जाये
खुशियाँ मुझको झोला भर ...! कभी कभी
छुपा के काहे रखती है सब,
...राज दिलों के खोला कर ....!कभी कभी
होंठो से छुकर इस गुल को,
चिंगारी से शोला कर ...! कभी कभी
कभी कभी कुछ बोला कर...!
तेरी एक हंसी दे जाये
खुशियाँ मुझको झोला भर ...! कभी कभी
छुपा के काहे रखती है सब,
...राज दिलों के खोला कर ....!कभी कभी
होंठो से छुकर इस गुल को,
चिंगारी से शोला कर ...! कभी कभी
सौ की सीधी सच्ची बात,
१७/०९/२०१०
सौ की सीधी सच्ची बात,
तेरी एकदम पक्की बात....!
जुल्फ सुनहरी, बदन चाँदी सा,
होंठ मीठे, तेरी खट्टी आँख ...! सौ की सीधी
मेरा कहा, करवा दे खुदा से,
अब तेरी उससे अच्छी बात ..! सौ की सीधी
कुछ सोचू कुछ निकले मुंह से,
मेरी तो अधकच्ची बात ....! सौ की सीधी
इस बावत तेरे साथ रहूँ तू
करे सदा मस्ती की बात ! सौ की सीधी
कमलेश दुबे
मंगलवार, 14 सितंबर 2010
राष्ट्र मंडल खेलों
राष्ट्र मंडल खेलों में देश की प्रतिष्ठा दाव पर लगी हे, और पूरे देश की प्रतिष्ठा पर कोई आंच नहीं आए इस लिए दिल्ली सरकार ने एहतियात के तौर पैर कुछ जरुरी कदम उठाए हे, सबसे पहले दिल्ली वासियों के चेहरे सजे धजे दिखे उसके लिए जगह-जगह मेकअप बूथ बनवाए जा रहे हे, इन मेकअप बूथ का काम इतना रहेगा की जिस आदमी की रंगत जरा सी उडी हुई नजर आएगी बूथ के कर्मचारी उसको पकड़कर फ़ौरन उसका मेकअप कर देंगे, दुसरे सभी दिल्ली वासियों को संताबंता के चुटकुलों की एक एक किताब दी जाएगी जिसे सारे दिल्ली वासी लगातार पड़ते रहेंगे जिससे सबके चेहरे हँसते हुए दिखे, दिल्ली के सारे भिखारियों को सरकार की तरफ से २०० रुपये के हिसाब से मेहनताना दिया जाएगा ताकि सड़क पर भीख मांगता हुआ कोई नजर नहीं आए, १५ दिनों तक कोई अपराध न हो इसलिए अपराधियों से अनुबंध किया गया है इसके लिए सरकार ने अपराधियों को घर बेठे काफी रकम पहुंचाई हे, सरकार को पता चला हे की सारे काम करने में काफी भ्रष्टाचार हुआ हे उसका पता लगाने को सरकार ने एक जाँच कमेटी बनाई हे, इ कमेटी एक साल में जाँच पूरी करके रिपोर्ट सोपेगी !
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