तुमको जो काले बादल वहां दिखाई देते हैं
है नहीं कुछ और मेरे घर का धुँआ हैं
उंगलियो को आंच लगती नहीं है आज
शायद नमी का लकड़ियों से कुछ समझोता हुआ हैं
हैं नहीं निशा किसी हादसे के ये
शराफत से जीने का यहाँ ये जुल्म हुआ है
भूखा वो सोया बात नयी नहीं उसकी
एक आदमी के साथ तो ये पहले भी हुआ है
कमलेश दुबे
है नहीं कुछ और मेरे घर का धुँआ हैं
उंगलियो को आंच लगती नहीं है आज
शायद नमी का लकड़ियों से कुछ समझोता हुआ हैं
हैं नहीं निशा किसी हादसे के ये
शराफत से जीने का यहाँ ये जुल्म हुआ है
भूखा वो सोया बात नयी नहीं उसकी
एक आदमी के साथ तो ये पहले भी हुआ है
कमलेश दुबे
