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मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

मैं क्यों अकेला खड़ा हूँ!

इस बात को लेकर में यहाँ खुद से लड़ा हूँ,
ये भीड़ है फिर भी मैं  क्यों अकेला खड़ा हूँ!

एक वक्त था उनके कदम उठते थे मेरे साथ,
आज मुझको देखो साथ उनके चलने को खड़ा हूँ!

निकलेगा कोई मेरी भी बात सुनने वाला,
ये आरजू लिये में वहां कबसे खड़ा हूँ !

कई बार दर पे जाकर मेनें उसको भी मनाया,
तब कहीं जाकर में अपने पावों पे खड़ा हूँ !