सूरज जाकर कही सोता है
रोज रोज ही ये होता है !
बाजारों में वाही चले अब
सिक्का जो सबसे खोटा है!
तलवारें खंजर की खेती
आदमी नफरत क्यों बोता है!
कभी किसी से नहीं सुना ये,
मेरा कद तुझसे छोटा है!
रटा रटाया ही बोलेगा,
पाला हुआ जो तोता है!
कमलेश दुबे
