जो तुझसे बातें साझा कर ले,
तू उसके गम आधा कर ले!
उलझ उलझ कर क्यों चलता है
रस्ता सीधा सादा कर ले !
तन्हा नहीं तू उड़ पायेगी
...ये पतंग तू मुझको धागा कर ले!
आज हंसी मौसम है फिर से,
कुछ ख्वाब पुराने ताजा कर ले !
कमलेश दुबे
गुरुवार, 16 सितंबर 2010
जुबां पे क्यों
जुबां पे क्यों ख़ामोशी ताले,
चलो साफ करे ये सारे जाले !
कहा उन्ही का बोलेंगे क्यों की,
सारे तोते उन्ही के पाले !
बेचारी एक मछली हे उस पर,
...डाल रहे सब अपने जाले !
यार मेरे संग मत चलना मै,
लेकर चलता हूँ खंजर- भाले !
हम ही कुछ निर्णय ले ले अब,
वो तो नहीं सुधरेंगे साले !
चलो साफ करे ये सारे जाले !
कहा उन्ही का बोलेंगे क्यों की,
सारे तोते उन्ही के पाले !
बेचारी एक मछली हे उस पर,
...डाल रहे सब अपने जाले !
यार मेरे संग मत चलना मै,
लेकर चलता हूँ खंजर- भाले !
हम ही कुछ निर्णय ले ले अब,
वो तो नहीं सुधरेंगे साले !
दिल के तार टटोला
दिल के तार टटोला कर,
कभी कभी कुछ बोला कर...!
तेरी एक हंसी दे जाये
खुशियाँ मुझको झोला भर ...! कभी कभी
छुपा के काहे रखती है सब,
...राज दिलों के खोला कर ....!कभी कभी
होंठो से छुकर इस गुल को,
चिंगारी से शोला कर ...! कभी कभी
कभी कभी कुछ बोला कर...!
तेरी एक हंसी दे जाये
खुशियाँ मुझको झोला भर ...! कभी कभी
छुपा के काहे रखती है सब,
...राज दिलों के खोला कर ....!कभी कभी
होंठो से छुकर इस गुल को,
चिंगारी से शोला कर ...! कभी कभी
सौ की सीधी सच्ची बात,
१७/०९/२०१०
सौ की सीधी सच्ची बात,
तेरी एकदम पक्की बात....!
जुल्फ सुनहरी, बदन चाँदी सा,
होंठ मीठे, तेरी खट्टी आँख ...! सौ की सीधी
मेरा कहा, करवा दे खुदा से,
अब तेरी उससे अच्छी बात ..! सौ की सीधी
कुछ सोचू कुछ निकले मुंह से,
मेरी तो अधकच्ची बात ....! सौ की सीधी
इस बावत तेरे साथ रहूँ तू
करे सदा मस्ती की बात ! सौ की सीधी
कमलेश दुबे
मंगलवार, 14 सितंबर 2010
राष्ट्र मंडल खेलों
राष्ट्र मंडल खेलों में देश की प्रतिष्ठा दाव पर लगी हे, और पूरे देश की प्रतिष्ठा पर कोई आंच नहीं आए इस लिए दिल्ली सरकार ने एहतियात के तौर पैर कुछ जरुरी कदम उठाए हे, सबसे पहले दिल्ली वासियों के चेहरे सजे धजे दिखे उसके लिए जगह-जगह मेकअप बूथ बनवाए जा रहे हे, इन मेकअप बूथ का काम इतना रहेगा की जिस आदमी की रंगत जरा सी उडी हुई नजर आएगी बूथ के कर्मचारी उसको पकड़कर फ़ौरन उसका मेकअप कर देंगे, दुसरे सभी दिल्ली वासियों को संताबंता के चुटकुलों की एक एक किताब दी जाएगी जिसे सारे दिल्ली वासी लगातार पड़ते रहेंगे जिससे सबके चेहरे हँसते हुए दिखे, दिल्ली के सारे भिखारियों को सरकार की तरफ से २०० रुपये के हिसाब से मेहनताना दिया जाएगा ताकि सड़क पर भीख मांगता हुआ कोई नजर नहीं आए, १५ दिनों तक कोई अपराध न हो इसलिए अपराधियों से अनुबंध किया गया है इसके लिए सरकार ने अपराधियों को घर बेठे काफी रकम पहुंचाई हे, सरकार को पता चला हे की सारे काम करने में काफी भ्रष्टाचार हुआ हे उसका पता लगाने को सरकार ने एक जाँच कमेटी बनाई हे, इ कमेटी एक साल में जाँच पूरी करके रिपोर्ट सोपेगी !
शुक्रवार, 9 अप्रैल 2010
जादू हबीब जी का
देर तक कायम रहने वाला नशा
यूँ तो नाटक हमेशा से ही मुझे आकर्षित करते है ! जब-जब भारत भवन भोपाल में नाटक होता है में देखता हूँ पिछले दिनों १२ दिनों के रंग आधार नाट्य समारोह का समापन 0७/०४/२०१० को "चरणदास चोर" से हुआ हबीब तनवीर जी के इस नाटक की खास बात यह है पूरे भारत में जहाँ जहाँ भी इसका मंचन होता है, दर्शक खींचे चले आते है लोगों को मंत्र मुग्ध करने वाला ये नाटक चुम्बक की नाई अपनी और खींचता है इस नाटक की प्रतिष्ठा किसी से छुपी नहीं है कमोबेश हमेशा की तरह इस बार भी शाम ५ बजे से भारत भवन ने लोगों को अपनी और खीचना शुरू कर दिया था आम तोर पर टिकिट लेने से गुरेज करने वाले लोगों ने भी टिकिट लेकर इस नाटक को देखते है. ७ तारीख को भारत भवन के अन्तरंग हाल में जितने लोग थे उससे ज्यादा लोग बाहर प्रोजेक्टर पर नाटक का आन्नद ले रहे थे.
भांग को न पीने वाले लोग, जेसे होली के शुभ अवसर पर इसका सेवन कर लेते है वेसे ही नाटक को न देखने वाले लोग इस नाटक के प्रदर्शन की सुनकर इसका रसास्वादन करने चले आते है जितनी बार ये नाटक भारत भवन में हुआ है लोगों का हुजूम चला आता है लोगों के साथ -साथ मेरी मंशा भी सबसे आगे की कतार में बैठकर नाटक देखने की होती है अक्सर दुसरे प्रदर्शनों में लोगों का ध्यान नाटक की वेशभूषा, अभिनय, प्रकाश परिकल्पना, और नाटक से जुड़ी दूसरी बातों पर भी जाता है, पर इस नाटक में दर्शक ऐसा खो जाता है की उसका ध्यान इस और जाता ही नही है छतीसगढ़ के गांवों के कलाकार जब एक साथ अपना जादू बिखरते है तो आदमी अपनी सुध-बुध खो देता है कभी कभी यूँ लगता है नाटक के सारे कलाकार दर्शकों को किसी जादूगर की भांति अपने सम्मोहन से जकड लेते है. इस नाटक को देखते वक्त दर्शक एक दूसरी ही दुनिया में चला जाता है.
कुल मिलाकर हबीब जी की "चरणदास चोर" नाम की ये दारू की बोतल जब-जब खुलती है तब-तब सारे लोग दुनिया की परवाह किये बिना उसे पीने चले आते है और उसे पीने के बाद कई दिनों तक उसके नशे में डूबे रहते है में यही दुआ करता हूँ की हमारे प्यालों कभी रीते नहीं .
जैसा मुझे समझ आया
कमलेश दुबे
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