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गुरुवार, 16 सितंबर 2010

जो तुझसे बातें

जो तुझसे बातें साझा कर ले,
तू उसके गम आधा कर ले!
उलझ उलझ कर क्यों चलता है
रस्ता सीधा सादा कर ले !
तन्हा नहीं तू उड़ पायेगी
...ये पतंग तू मुझको धागा कर ले!
आज हंसी मौसम है फिर से,
कुछ ख्वाब पुराने ताजा कर ले !


कमलेश दुबे