जुबां पे क्यों ख़ामोशी ताले,
चलो साफ करे ये सारे जाले !
कहा उन्ही का बोलेंगे क्यों की,
सारे तोते उन्ही के पाले !
बेचारी एक मछली हे उस पर,
...डाल रहे सब अपने जाले !
यार मेरे संग मत चलना मै,
लेकर चलता हूँ खंजर- भाले !
हम ही कुछ निर्णय ले ले अब,
वो तो नहीं सुधरेंगे साले !
