दिल के तार टटोला कर,
कभी कभी कुछ बोला कर...!
तेरी एक हंसी दे जाये
खुशियाँ मुझको झोला भर ...! कभी कभी
छुपा के काहे रखती है सब,
...राज दिलों के खोला कर ....!कभी कभी
होंठो से छुकर इस गुल को,
चिंगारी से शोला कर ...! कभी कभी
ye duniya agar mil bhi jaye to kya hai