27 /09 /2010
पिया, तोसे जो नैना मिलाऊँ
तो मनवा
ऊँची उड़ाने भरने लगे!
हाँ ऊँची उड़ाने भरने लगे!
जो मन में आए वो करने लगे,
जो मन को भाए वो करने लगे!
काहे मेनें गवाए
फिजूल में दिन,
ये कजरा, सबसे शिकायत
करता फिरे,
जहाँ चाहूँ नहीं
ये कंगना वहां भी
खन-खन करता फिरे
तेरे संग रहूँ
तो बासा गजरा भी
खूब जोर से महकने लगे ! पिया, तोसे जो......
पल में जिया मेरा धरती पर
पल में जा पहुंचे ये अम्बर तक
जो तुने तीर छोड़ा है नैनों का
वो जा पहुंचा है करजवा में अन्दर तक
जो तुने चोट हमें दी
हम उसकी दवा
तेरे इश्क की मरहम से करने लगे ! पिया, तोसे जो......
कमलेश दुबे
