http://www.vehle.comhttp://www.vehle.comhttp://www.vehle.comhttp://www.vehle.comhttp://www.vehle.comhttp://www.vehle.comhttp://www.vehle.com

शनिवार, 25 सितंबर 2010

चार कदम संग चलते लोग...!

25 /09 /2010

बेहद हिलते -डुलते लोग
रंग बदलकर मिलते लोग...!
जुल्म हदों के पर हुआ और,
फिर भी जुबां को सिलते लोग...! बेहद हिलते
आसमानी महंगाई में बस ये,
चार आने में बिकते लोग...!    बेहद हिलते
समय पर कर दी होती दवा तो,
फिर से नहीं उभरते रोग....!    बेहद हिलते
कबकी बदल जाती सूरत जो,
चार कदम संग चलते लोग...!   बेहद हिलते

 कमलेश दुबे