आ खड़ा हूँ मै तुम्हारे द्वार
कुछ शेष हो तो दे दो एक उपहार
कितने दिनों के बाद मंजिल ...
आज आई हे नजर
था नहीं, कोई कही भी
लेता जो अपनी खबर
तुमने किया रोशन मेरा संसार
आ खड़ा हूँ मै तुम्हारे द्वार
मध्य प्रदेश के धार जिले के राजा भोज अस्पताल में मेरा जन्म हुआ, तीन-चार साल का रहा होऊंगा तब भोपाल आ गए यहीं पर समाज शास्त्र से M.A किया लेखक नहीं हूँ पर जब-जब, जो-जो, जैसा-जैसा समझ में आता गया वो लिखता गया कभी गीत लिखे कभी गजल लिखी कभी नुक्कड़ नाटक लिखे कुछ दिनों से लिखे हुए को ब्लॉग पर लिखा रहा हूँ हूँ. मैं यहाँ उपलब्ध हूँ अपनी रचनाए आप सभी पाठक गण से साँझा करने के लिए. यहाँ प्रकाशित होने वाली सभी रचनाओ के सर्वाधिकार सुरक्षित है.अतः बिना अनुमति कही भी इनका प्रकाशन निषेध है.